Breaking News
मुजफ्फरपुर में स्नातक छात्र पर बाइक सवार बदमाशों ने किया हमला, पेट में लगी गोली, पुलिस जांच में जुटी
बिहार बजट में महिला सशक्तिकरण का रोडमैप: गांव की इकाई से शहर के बाजार तक, ट्रेनिंग से सीधे रोजगार तक
मोदी सरकार में बिहार को रेलवे की नई ताकत:रेल बजट नौ गुना बढ़ा,हाईस्पीड कॉरिडोर से बदलेगी कनेक्टिविटी
बिहार में जमीन दस्तावेजों का डिजिटल युग:1908 से अब तक की रजिस्ट्री एक क्लिक पर,दफ्तरों के चक्कर खत्म
बजट 2026-27: ‘शी मार्ट’ से जीविका दीदियों को मिलेगा नया बाजार, बिहार बन सकता है महिला उद्यमिता का हब
कैथी लिपि के दस्तावेज अब नहीं बनेंगे सिरदर्द, सरकार ने तय किया रेट और उपलब्ध कराए प्रशिक्षित अनुवादक
समस्तीपुर जिले के अपर जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने गणतंत्र दिवस पर जिलेवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं
निष्ठा, सेवा और स्मृतियों से सजी विदाई: आचार्य विजयव्रत कंठ को भावभीनी सम्मान-समारोह में दी गई विदाई
समृद्धि यात्रा का सातवां पड़ाव: मुजफ्फरपुर को 850 करोड़ की विकास सौगात देंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
बिहार में अप्रैल 2026 से बढ़ सकता है बिजली बिल, 3200 करोड़ पुराने बकाए की भरपाई के लिए नई दरों का प्रस्ताव
- Reporter 12
- 11 Feb, 2026
पटना।बिहार में 1 अप्रैल 2026 से बिजली का बिल महंगा हो सकता है।राज्य की दोनों पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों (साउथ और नॉर्थ बिहार पावर) ने विद्युत विनियामक आयोग को टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है।इस प्रस्ताव के अनुसार, पुराने 3200 करोड़ रुपए के बकाए की वसूली के लिए प्रति यूनिट लगभग 35 पैसे तक की दर वृद्धि की योजना बनाई गई है।बकाया राशि का संबंध 2012 में बिजली बोर्ड के बंटवारे और नए कंपनी गठन के समय की जिम्मेदारियों से है।उस समय कंपनियों को एसेट लायबिलिटी के तहत 1100 करोड़ रुपए सरकार से मिलने थे, इसके अलावा अन्य लंबित राशि को मिलाकर कुल बकाया 3200 करोड़ रुपए है।बिजली कंपनियों का कहना है कि सरकार ने अब तक यह राशि नहीं चुकाई, इसलिए कंपनियों ने इसे टैरिफ बढ़ाकर वसूलने की गुहार लगाई है।विद्युत विनियामक आयोग की तरफ से सुनवाई पूरी कर ली गई है।अगर सरकार बकाया राशि का भुगतान नहीं करती है तो नई दरें लागू की जाएंगी, जो 1 अप्रैल 2026 से 1 अप्रैल 2027 तक प्रभावी रहेंगी।सरकार की भूमिका इसमें अहम है।दरअसल, बिजली की दरों को आयोग तय करता है, जबकि दर को कम रखने या बढ़ाने के लिए अनुदान के माध्यम से सरकार हस्तक्षेप करती है।बिहार के आम नागरिकों के लिए यह बदलाव सीधे उनकी जेब पर असर डाल सकता है।बढ़ी हुई दरें घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे उद्योगों के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ ला सकती हैं।सरकार और आयोग की अगली बैठक में अंतिम निर्णय लेने के बाद ही नई दरों को लागू किया जाएगा।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *







